रे दोस्त और मोहल्ले वाले समझते हैं कि मैं बस पै से के लिए निशा के साथ हूँ. वो पैसा कमाती है और मैं ख़र्च करता हूँ. आम लोगों को भी यही लगता है कि किन्नर पैसे वाले होते हैं. वो शौक़ से रहते हैं. उनके पास मुफ़्त का पैसा होता है और पा रिवारिक ज़िम्मेदा रियाँ कुछ होती नहीं. लेकिन ये लोगों की ग़लत फ़हमी है. ये अधूरा सच है. मैं और निशा इस दस बाई दस फ़ुट के क़मरे में रहते हैं. रात को जब क़मरे में हल्की रो शनी होती है तो दीवारों का ये केसरिया रंग मुझे अच्छा लगता है. हमारे पास एक ढोलक है, एक बिस्तर और कोने में दुर्गा जी की ये मूर्तियाँ. निशा इनकी पूजा करती है. निशा कहती है कि जब हम अपने रिश्ते के बारे में अपने परिवारवालों को ही नहीं समझा पाये , तो लोगों को इस बारे में समझाने से क्या बदल जायेगा. इसीलिए घर के बारे में वो बाहर के लोगों से कम ही बात करती है. निशा मुझे कि सी हिरोइन से कम नहीं लगती. बड़ी -बड़ी आँखें. साफ़ रंग. और माथे पर बड़ी बिंदी लगाने का उसे बहुत शौक़ है. हम दोनों की कहानी बारह साल पहले दोस्ती से शुरू हुई थी.हले निशा का नाम प्र वीण था. हम एक ही मोहल्ले में रहते थे. ज...